राजहेश वैद्य के वीणा वादन ने विरासत महोत्सव में बिखेरी सुरों की छटा - Dehra Darpan

राजहेश वैद्य के वीणा वादन ने विरासत महोत्सव में बिखेरी सुरों की छटा

देहरादून । गढ़ी कैंट, निंबूवाला स्थित हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित किए जा रहे विरासत महोत्सव में आज गुरूवार को भिन्न-भिन्न स्कूलों के बच्चों ने उत्साह पूर्वक अपनी-अपनी गायन और वाद्य संगीत की आकर्षक एवं भव्य प्रस्तुतियां दीं। विरासत साधना में 21 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी संगीत प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया। इस गोल्डन अवसर पर विद्यार्थियों ने बांसुरी, सितार, वायलिन, तबला, पखावज और अन्य वाद्ययंत्रों के माध्यम से अपनी कला प्रस्तुत की। साथ ही विद्यार्थियों ने गायन की प्रस्तुतियों से भी श्रोताओं को मंत्र मुग्ध किया। विभिन्न वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों और सुरों के संगम ने कार्यक्रम को संगीतमय बना दिया।
इस आयोजन में माउंट लिटेरा ज़ी स्कूल, दून इंटरनेशनल स्कूल सिटी कैंपस, ज्ञानंदा स्कूल फॉर गर्ल्स, माउंट फोर्ट एकेडमी, ग्ली म्यूजिक एकेडमी, द टोंसब्रिज स्कूल, गुरु स्मृति संगीत शिक्षा केंद्र, पीवाईडीएस लर्निंग एकेडमी, वेलहम बॉयज़ स्कूल, घुंघरू कथक संगीत महाविद्यालय, फ्लाईफोट पब्लिक स्कूल, सरगम कला केंद्र, होपटाउन गर्ल्स स्कूल, हेरिटेज नॉर्थ कैंपस, तरुण संगीत एवं नृत्य मंच, द एशियन स्कूल, सुरेंद्र संगीत विद्यालय समिति, सेंट कबीर अकादमी देहरादून, द ओबेरॉय स्कूल ऑफ इंटीग्रेटेड स्टडीज़ (ओएसआईएस) सहित विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। विरासत साधना का उद्देश्य विद्यार्थियों को संगीत और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना तथा उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच प्रदान करना है। इस आयोजन ने युवा प्रतिभाओं को संगीत के विभिन्न रूपों से परिचित होने और अपनी कला को निखारने का अवसर दिया। विरासत साधना में होनहार और ऊर्जावान विद्यार्थियों का उत्साह निरंतर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है I
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने दीप प्रज्वलित कर किया विरासत की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ
रीच संस्था द्वारा आयोजित विरासत महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेश सुशील राहुल ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर उन्होंने भारतीय कला एवं संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को समर्पित इस महोत्सव का हिस्सा बनकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दीप प्रज्वलन के साथ सांस्कृतिक संध्या का विधिवत शुभारंभ हुआ, जिसके बाद कार्यक्रम में संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय विरासत की विविधता और सुंदरता देखने को मिली।

…..और भारतीय शास्त्रीय संगीत के विश्व विख्यात लोक कलाकार सिद्धार्थ बेलमन्नू के संगीत-सार से गुलज़ार हुआ रीच संस्था का शाही विरासत महोत्सव
विरासत की शाही महफिल आज गुरुवार को उस समय गुलो-गुलज़ार हो गई जब उसमें मशहूर लोक सांस्कृतिक कलाकार सिद्धार्थ बेलमन्नू के संगीत ने अपना बेहतरीन आकर्षक जादू कर डाला I भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को समर्पित इस प्रस्तुति में उन्होंने अपनी गायकी, सुरों की शुद्धता और भावपूर्ण अभिव्यक्ति से श्रोताओं को संगीत की गहराइयों से रूबरू कराया।
सिद्धार्थ बेलमन्नू ने मंच से अपनी प्रस्तुति के लिए राग की घोषणा की, जिसके बाद उन्होंने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया। उनकी गायकी में सुरों का सहज प्रवाह और राग की बारीकियों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति देखने को मिली। इस अवसर पर तबले पर शुभ महाराज और हारमोनियम पर जाकिर ढोलपुरी ने संगत की। दोनों कलाकारों की सधी हुई संगत ने गायन को और भी प्रभावशाली बनाया तथा पूरी प्रस्तुति में सुर और ताल का सुंदर सामंजस्य देखने को मिला। विरासत महोत्सव के मंच पर प्रस्तुत इस शास्त्रीय संगीत संध्या ने भारतीय संगीत की उत्कृष्ट परंपरा को जीवंत किया और श्रोताओं को सुरों से सजी एक यादगार संगीतमय अनुभूति प्रदान की।
सिद्धार्थ बेलमन्नू एक विलक्षण प्रतिभा के धनी और उभरते हुए अग्रणी भारतीय शास्त्रीय संगीतकार हैं। वे कर्नाटक के उडुपी जिले के कारकाला कस्बे से आते हैं। उनके माता-पिता ने बचपन में ही पहचान लिया था कि उन्हें एक सुगठित आवाज मिली है, जो तीन सप्तकों में धारा प्रवाह गा सकती है। मुख्य बात यह है कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा कर्नाटक शास्त्रीय संगीत में ही शुरू हुई । बाद में वे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत से परिचित हुए और प्रसिद्ध हिंदुस्तानी संगीतकार श्री पी आर मंजुनाथ के मार्गदर्शन में अपनी शिक्षा जारी रखी।
इसके बाद उन्होंने ग्वालियर और किराना घराना के दिग्गज और इन दोनों शैलियों के महारथी, गायनाचार्य गुरुराव देशपांडे और भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी के शिष्य, महान संगीतकार पंडित विनायक तोरवी के मार्गदर्शन में अपना प्रशिक्षण जारी रखा। वे पिछले 13 वर्षों से पंडित जी के मार्गदर्शन में गुरुकुल प्रणाली का व्यापक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिसमें वे परंपरा को समाहित करते हुए अपनी अनूठी शैली और संगीतमय पहचान का निर्माण कर रहे हैं। सिद्धार्थ ऑल इंडिया रेडियो में “ए-ग्रेड” संगीतकार हैं। उन्होंने हाल ही में विश्वकर्मा विश्वविद्यालय, पुणे और लक्ष्मीनारायण ग्लोबल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विश्वविद्यालय से वैश्विक संगीत में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है। उन्हें “शन्मुख संगीत शिरोमणि पुरस्कार”, “हयवदना पुरस्कार” और कर्नाटक राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। सिद्धार्थ देश और विदेश में कई प्रतिष्ठित मंचों और कार्यक्रमों में प्रस्तुति दे चुके हैं।

झमाझम बारिश में चला विख्यात राजहेश वैद्य की वीणा तरंगों का गजब जादू
विरासत की सांस्कृतिक संध्या-ए-महफिल में गुरुवार का दिन जहां झमाझम बारिश की आग़ोश में रहा, वहीं प्रख्यात सांस्कृतिक लोक वीणा वादक राजहेश वैद्य की वीणा से निकलने वाली मधुर लय तथा मदहोश बना रही तरंगों के जादू ने सभी को दीवाना बना दिया I राजहेश वैद्य ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से वीणा की मधुरता, गहराई और लयात्मकता को खूबसूरती से प्रस्तुत किया। उनके वादन में सुरों का सहज प्रवाह और ताल के साथ उनका सुंदर सामंजस्य देखने को मिला। वीणा के तारों से निकलती मधुर धुनों ने श्रोताओं को भारतीय वाद्य संगीत की विशिष्टता और समृद्ध विरासत का अनुभव कराया।
इस अवसर पर मृदंगम पर मोहन रमन और तबले पर प्रवीण नारायण ने संगत की। दोनों कलाकारों की प्रभावशाली संगत ने वीणा वादन को और भी आकर्षक बनाया। मृदंगम और तबले की लयकारी के साथ वीणा के स्वरों का तालमेल पूरी प्रस्तुति में विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विरासत महोत्सव के मंच पर प्रस्तुत इस संगीत संध्या ने भारतीय शास्त्रीय वाद्य संगीत की सुंदरता और विविधता को उजागर किया। राजहेश वैद्य और उनके साथ संगत कर रहे कलाकारों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को एक यादगार संगीतमय अनुभव प्रदान किया। लोकप्रिय वीणा वादक राजहेश वैद्य की शानदार एवं सभी को दीवाना बनाने वाली शाही मेहमानों की महफ़िल में वीणा की बयार बहती गई और विरासत के मेहमान दीवाना होते गए I राजहेश वैद्य एक समृद्ध संगीतमय विरासत में जन्मे हैं, और उन्हें अपने पिता और गुरु श्री के.एम. वैद्यनाथन से असाधारण प्रतिभा विरासत में मिली है, जो मृदंगम वादन में एक प्रतिष्ठित उस्ताद हैं।
राजहेश वैद्य के जीवन में एक और महत्वपूर्ण प्रभाव कर्नाटक संगीत के दिग्गज वीणा वादक चिट्टी बाबू का रहा, जिनके मार्गदर्शन में राजेश ने वीणा की सूक्ष्म बारीकियों में महारत हासिल की। वे अब भी संगीत की दुनिया में दिग्गज संगीतकार श्री एल. शेनकर के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहे हैं। एक समकालीन वीणा वादक के रूप में, राजहेश अपनी तीव्र गति और विद्युत व प्रवर्धित वाद्ययंत्रों पर महारत से परिपूर्ण, अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से वैश्विक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। प्रसिद्ध एल्बम “प्लेइंग फॉर चेंज” में राजहेश वैद्य का योगदान उनके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को रेखांकित करता है। यह एक ऐसा आंदोलन है जो संगीत की शक्ति के माध्यम से वैश्विक समुदाय को प्रेरित और एकजुट करने के लिए समर्पित है। उन्होंने भारत और विदेशों में प्रस्तुतियां दी हैं। राजेश वैद्य के नाम 50 से अधिक एल्बमों का विशाल संग्रह है। उन्हें कई अन्य सम्मानों के साथ-साथ “श्री कांची कामकोटी पीठा आस्थाना विद्वान” और “कलाइमामणि” जैसी प्रतिष्ठित उपाधियों से नवाजा गया था।